आज सोमवार भगवान् शिव का दिन और माँ दुर्गा नवरात्रि अष्टमी का दिन , आज माँ ने लाल रंग का वस्त्र धारण किया है, और नव आभूषण भी
धीरे धीरे नवरात्रि नव रूप तक पहुँच रही है, माँ का प्रसाद मिल रहा है,
भारत वर्ष में ये नव दिन शायद इतने लम्बे समय का कोई त्यौहार नहीं
और धरा की पावनता बढ़ जाती है.
कल हमें माँ के जागरण में जाना है , मन में बहुत ही उत्साह है, मेरे एक
बंधू हर वर्ष इसका आयोजन करते हैं,...माँ को लाल और भव्य चुनरी चढ़ाई जाती है, भजन मंडली बाहर से आती है और चारों तरफ माँ की जयकारा गूंजती हैं,,,मन आह्लादित रहता है,,,आप कहेंगे ये तो कल है और मैं आज ही बता रही हूँ, आज ही मन में इतनी खुशी है की मैं खुद को रोक नहीं पायी,,,,पूरे वर्ष माँ के आशीर्वाद से ही मन चिंता मुक्त होता है,
कल दुखद समाचार यश चोपड़ा जी का डेंगू से निधन ,,,और मैं अभी इसी
बीमारी से उबरी थी,,,मन में भय बिलकुल नहीं था उस समय जब मैं
बीमार थी मगर अब सुन कर ऐसा लगता है क्या इतना भयावह है ये बीमारी और माँ को धन्यबाद,,,की मैं आज उनकी पूजा करने में सछम हूँ, माँ तो सबकी माँ है, उन्हें अपनी माँ की तरह पुकारिए, अगर हमने कोई गलती की है तो बच्चे की तरह ही माँ से छमा मांगिये, वो मुस्करा कर
हमें अभयदान देंगी...लेकिन याद रहे वो जगत माँ है और हम त्रिन के समान, फिर भी हमें उनका स्नेह प्राप्त है,,,इसीलिए मन की श्रध्हा
कहीं भी कम नहीं होनी चाहिए,,,,जिसका दूसरा नाम विशवास भी है...
जय माता दी
धीरे धीरे नवरात्रि नव रूप तक पहुँच रही है, माँ का प्रसाद मिल रहा है,
भारत वर्ष में ये नव दिन शायद इतने लम्बे समय का कोई त्यौहार नहीं
और धरा की पावनता बढ़ जाती है.
कल हमें माँ के जागरण में जाना है , मन में बहुत ही उत्साह है, मेरे एक
बंधू हर वर्ष इसका आयोजन करते हैं,...माँ को लाल और भव्य चुनरी चढ़ाई जाती है, भजन मंडली बाहर से आती है और चारों तरफ माँ की जयकारा गूंजती हैं,,,मन आह्लादित रहता है,,,आप कहेंगे ये तो कल है और मैं आज ही बता रही हूँ, आज ही मन में इतनी खुशी है की मैं खुद को रोक नहीं पायी,,,,पूरे वर्ष माँ के आशीर्वाद से ही मन चिंता मुक्त होता है,
कल दुखद समाचार यश चोपड़ा जी का डेंगू से निधन ,,,और मैं अभी इसी
बीमारी से उबरी थी,,,मन में भय बिलकुल नहीं था उस समय जब मैं
बीमार थी मगर अब सुन कर ऐसा लगता है क्या इतना भयावह है ये बीमारी और माँ को धन्यबाद,,,की मैं आज उनकी पूजा करने में सछम हूँ, माँ तो सबकी माँ है, उन्हें अपनी माँ की तरह पुकारिए, अगर हमने कोई गलती की है तो बच्चे की तरह ही माँ से छमा मांगिये, वो मुस्करा कर
हमें अभयदान देंगी...लेकिन याद रहे वो जगत माँ है और हम त्रिन के समान, फिर भी हमें उनका स्नेह प्राप्त है,,,इसीलिए मन की श्रध्हा
कहीं भी कम नहीं होनी चाहिए,,,,जिसका दूसरा नाम विशवास भी है...
जय माता दी

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